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Kartik Mas ka Nahane ka Najan - कार्तिक मास का नहाने का भजन

Read about the Kartik Nahane ka Bajan. Here given some lines of Mas Kartik nahane ka bajan. कार्तिक नहाने का भजन हिंदी मे दिया जा रहा हैं। दीजै-दीजै मेरे जा ठाकुर की फेरी फेरी देत महाफल होवे,कट जाए जम की बैडी़। दीजै-दीजै मेरे जा ठाकुर की फेरी। रथ ठाडौ़ रहियो रे,बंसी के बजैया,रथ ठाडौ़ रहिये। कहाँ गई गोपी, कहाँ गये ग्वाले,कहाँ गये बंसी के बजामन हार। भज गई गोपी, भज गये ग्वाल,बंसी के बजैया गये ससुराल। रथ ठाडौ़ रहियो रे,बंसी के बजैया। पीसे कटें मेरी बलाय ,मेरे घर आये कृष्ण मुरार। छाने फलकें मेरी बलाय,मैंने पाये कृष्ण मुरार।

Dev Uthane ka Bajan in Hindi - देव उठाने का भजन

Read about the Dev uthane ka Bhajan. Here given some line of Dev uthane ka bajan. देव उठाने का भजन की कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं। उठो देवा जागो रे देवा , चारों मास बराबर सोये --2 सावन सोये, भादौ सोये, कार्तिक सोये , चारों मास बराबर सोये --2 आरे मूसे डाव कटा कटा कट , बान बुन बान बुनाय खाट, बुनाय खाट बुलाय वामन दीजे, वामन को दीजे कहाँ होय -2 कहा होय वामन को दीजे , . सदा पुण्य होय सदा फल होय।।

Holi ki Katha in hindi - होली की कथा

Read about the Holi ki katha. Here given hindu Festival Holi ki kahani. होली की कथा हिंदी मे दी जा रही हैं। राजा हिरणाकश्यप का पुत्र भक्त प्रहलाद था।वह भगवान का बहुत बडा भक्त था मगर उसका पिता उसकी भक्ति देखकर बहुत नाखुश होता था वह अपने पुत्र पर अत्याचार करता था । उसे तरह -तरह की यातनाएँ देता रहता था ताकि वह विष्णु भगवान की भक्ति छोडकर उसके साथ अधर्म के मार्ग पर चल सके। परन्तु प्रहलाद ने धर्म का मार्ग नहीं छोडा़। अन्त मे हिरण्यकशप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया ,होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती।इसलिए वह प्रहलाद को गोदी मे बैठाकर जलती हुई अग्नि मे बैठ गयीं। लेकिन ईश्वर की कृपा से होलिका तो जल गयीं लेकिन प्रहलाद बच गया। जैसी ईश्वर ने प्रहलाद की लाज रखी वैसी ही सब ही सब की रखी।

Ahoi Ashtami ki Kahani in Hindi - अहोई अष्टमी की कहानी

Read about the story of Ahoi Ashtami ki kahani. This festival is celebrate for children. अहोई अष्टमी की कहानी हिंदी मे दी जा रही हैं। दीपावली से आठ दिन पहले अहोई अष्टमी आती हैं। दो नन्द भाभी लीपने के लिए मिट्टी लेने गई।नन्द मिट्टी खोद रही थी कि उसमें स्याऊ माता के बच्चे उसने वह मिट्टी मे छुपा दिए।जब स्याऊ-म्याऊ की माता आई तो उसने नन्द को अपने पंख मे छुपा लिया।भाभी बोली मेरी नन्द को छोड़ दो।स्याऊ माता बोली या तो अपना सुहाग दे या अपनी कोख दे भाभी बोली अगर सुहाग दूँगी तो सास लडेगी तुम मेरी कोख ले लो,ऐसा सुनते ही स्याऊ माता ने नन्द को छोड़ दिया।अब जब भी उसके बच्चे होते तो मर जाते, इस तरह उसके सात बच्चे मर गए जब उसे आंठवी बार गर्भ था तो एक बुढिया बोली कि जब स्याऊ-म्याऊ की माता आए तो घर को लीप पोत कर दरवाजे के सामने काँटे बिछा देना औऱ कोरे-कोरे जेयर भर देना, जब वो किवाड़ खोलने के लिए कहे तो कह देना कि पहले त्रिवाचा भरो कि अब बच्चे नहीं लोगी।उसने त्रिवाचा भर दिया तो उसने किवाड़ खोलकर उसके पैर मे से काँटे निकाल दिए तो वह उसे आशीर्वाद देने लगी कि दूधो नहाओ पूतो फलो । वह बोली पूतो को तो ...

Dubara Sate ki Kahani in Hindi - दूबरी साते की कहानी

Read about the story of duvriSathi ki kahani. दूवरी सातें की कहानी इस प्रकार हैं। एक सास बहु थी। सास जंगल मे चली गयीं, बहु घर पर रह गई।सास बहु से कह गई कि धानूरा पानूरा समार कर रखियो। बहु ने धानूरा पानूरा को काट पतीली पर। चढा़ दिया।सास लौट कर आई तो उसने धानूरा पानूरा के बारे मे पूछा। बहु बोली हाँ माँ जी सम्भाल लिया औऱ पतीली मे भी चढा़ दिया।सास बोलीअरे ये तूने यह क्या कर दिया ,गैय्या आयेगी तो पछाड़ खाएगी।सास ने धानूरा पानूरा को घडे़ मे भरकर घूरे पर गाड़ दिया, गैय्या आएगी सींग मारेगी तो घडा़ फूट जाएगा। गैय्या सीधी घूरे पर पहुँची ,उसने जैसे ही सींग मारा बछडा़ खडा़ हो गया।गैय्या बोली मुझे तो तीन घंटे भी नहीं लगे पर तुझे एक साल लगेगा तब अपने बेटे को पालना। जैसी पहले आयी वैसी किसी की न आए,जैसी पीछे आयी वैसी सब की आए।

Karva Chauth ki Kahani in Hindi - करवा चौथ व्रत कथा

Read about the story of Karva Chauth. Hindu festival Karva Chauth ki kahani in Hindi. Karva Chauth Vrat Katha ka pure bharat me bahut mahatv hai. करवा चौथ का त्यौहार पति की लम्बी उम्र के लिए रखे जाने वाले व्रत का दिन होता है। करवाचौथ व्रत की कथा हिंदी मे दी जा रही हैं। एक राजा था औऱ एक रानी थी,उनके सात पुत्र औऱ एक पुत्री थी।सभी भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे।वे उसके बिना खाना भी नहीं खाते थे। बहन के विवाह के बाद उसकी पहली करवाचौथ थी ,बहन ने करवाचौथ का व्रत रखा था। उसके भाई खाना खाने बैठे तो पूछा हमारी बहन कहां हैं, उनकी माँ ने बताया कि आज उसका करवाचौथ का व्रत हैं।भाइयों ने पूछा कि वह कब खाना खाएगी।माँ ने कहा कि वह तो चाँद देखकर ही खाना खायेगी। उसके भाई बोले चाँद तो हम अभी उगा देते हैं। कोई भाई घास लाया, कोई छलनी लेकर आया, कोई कुछ लेकर आया।इस प्रकार उन्होंने बहन के लिए चाँद उगा दिया।बहन से जाकर बोले कि चाँद निकल आया हैं।बहन ने अपनी भाभियों से बोली चाँद निकल आया हैं। भाभियाँ बोली कि हमारा चाँद अभी नहीं निकला तुम्हारा चाँद निकला हैं।बहन ने उसी चाँद को.अरग देकर खाना खाने ...