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Eassy on Dr. C. V. Raman in hindi - डा. सी. वी रमन पर निबंध

Read about the eassy on Dr. C V Raman. Here given some line on Dr. C V Raman for educational purpose. डा. सी वी के जीवन पर संक्षिप्त निबंध हिंदी मे दिया जा रहा है। चंद्रशेखर वेंकट रमन का जन्म 7 नवंबर,1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के एक छोटे से गांव थिरुवनैक्कवल मे हुआ था।इनकी माता का नाम पार्वती अम्मल औऱ इनके पिता का नाम आर.चन्द्रशेखर अय्यर था। इनके पिता गणित एवं विज्ञान के अध्यापक थे।इनके व्यक्तिव पर इनके पिता की अमिट छाप दिखाई देती है। बचपन मे इन्होंने श्रीमान आयंगर से अंग्रेजी सीखी। 11वर्ष की उम्र मे ही इन्होंने दसवीं की परीक्षा पास कर ली। सन् 1901 मे अवर स्नातक की परीक्षा पास की।ये असाधारण प्रतिभा के धनी थे।कम उम्र मे ही इन्होंने अपनी शिक्षा पूरी कर ली। रमन का जीवन सादगी एंव सरलता से परिपूर्ण था।इनकी पत्नी का नाम लोकसुंदरी था। सन् 1906 मे रमन ने एम.एससी.की परीक्षा उत्तीर्ण की।इसके पश्चात इन्हें वित्त विभाग मे लेखाकार की नौकरी प्राप्त हुई।किन्तु रमन सरकारी सेवा करते रहने से संतुष्ट नहीं थे।वे तो विज्ञान के क्षेत्र मे परचम लहराना चाहते थे। सन् 1922 मे रमन ने ' प्र...

Mejar Dhyan Chand per Nibandh in Hindi - ध्यान चंद पर निबंध

Read about the eassy on the great hockey Player Dhyan Chand .Here given some line about Dhyan Chand for educational purpose. हाकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी ध्यान चंद का जीवन परिचय हिंदी मे दिया जा रहा है। ध्यान चंद जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद मे हुआ था। इनके पिता सेना मे सामान्य रंगरूट थे। इनकी आर्थिक स्थिती ठीक न होने के कारण इनकी स्कूली शिक्षा सामान्य ढंग से ही हो सकी। इनके परिवार का रहन सहन बहुत सामान्य था। बचपन से ही इन्हें हाकी का खेल बहुत पसंद था। आर्थिक परेशानियों के चलते इन्हें भी सेना मे नौकरी करनी पडी, वही इन्होने सेना की टीम मे खेलना प्रारंभ किया। तब यह केवल 16 साल के थे। 1926 मे इन्हें न्यूजीलैंड भेजा गया। वहाँ इन्होंने उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन किया। यह एम्सटर्डम ओलंपिक मे हालैड गए औऱ भारतीय टीम मे खेलकर स्र्वण पदक प्राप्त किया। 1932 मे लास एंजेल्स ओलंपिक मे भी देश की टीम मे स्र्वण पदक प्राप्त किया। 1936 मे बर्लिन ओलंपिक मे भी देश की टीम मे स्र्वण पदक प्राप्त करके टीम के कप्तान भी बने। लगातार तीन स्र्वण पदक प्राप्त करने के बाद इन्हें हाकी का जादूगर कहा जाने लगा। ...

Bhagini Nivedita ka Eassy in Hindi - भगिनी निवेदिता का निबंध

Read about the eassy on Bhagini Nivedita.Here given some knowledge for educational purpose about Bhagini Nivedita. भगिनी निवेदिता पर निबंध, व उनका जीवन परिचय हिंदी मे दिया जा रहा हैं। निवेदिता का अर्थ है--- ईश्वर को समर्पित। भगिनी निवेदिता का बचपन का नाम मारगेट था।इनका जन्म 28 अक्टूबर, उत्तर आयरलैंड के टायरोन प्रान्त के डन्गानान नामक एक छोटे से उपनगर मे हुआ था।इनके पिता का नाम सेम्युअल नोबल तथा माता का नाम मेरी हैमिल्टन था। 1884 मे इन्होंने अपनी शिक्षा पूरी कर ली औऱ केसि्वक के एक स्कूल मे शिक्षिका के रुप मे कार्य करने लगी। 1893 मे स्वामी विवेकानंद जी ने शिकागो मे आयोजित सर्वधर्म सम्मेलन मे अपना प्रेरणादायक भाषण देकर करोड़ों अमेरिकन नागरिकों का दिल जीत लिया था।अपने प्रवचन के बीच स्वामी ने कहा-- आज संसार को ऐसे बीस पुरुषों तथा बीस महिलाओं की जरूरत है,जो जनसेवा के लिए अपने आप को समर्पित कर दे। स्वामी जी की प्रेरणा पर मारगेट ने अपना जीवन स्वामी जी को सौंप दिया। 28 जनवरी 1898 को मारगेट भारत आई। स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने मारगेट का नाम बदलकर 'निवेदिता' रख दिया। 13ज...

Eknath Rande Par Nibandh in Hindi - एकनाथ रानडे पर निबंध, व जीवन परिचय

Read about the jivani of Eksath Rande .Here given some knowledge about Eksath Rande for educational purpose. एकनाथ रानडे का जीवन परिचय हिंदी मे दिया जा रहा हैं। एकनाथ रानडे का जन्म 19 नवंबर 1914 को अमरावती जिले के टिटिला नामक गांव मे हुआ था। गांव मे स्कूल न होने के कारण उनकी शिक्षा उनके बडे भाई के घर नागपुर मे हुई। वहीं इनका संघ से परिचय हुआ। 1936 मे शिक्षा पूरी करने के बाद वे प्रचारक के रूप मे मध्य प्रदेश मे गये। एक नाथ रानडे जी ने निर्वासित हिन्दू बन्धुऔ का पुनर्वसन करने के लिए संघ ने कलकत्ता मे "वास्तुहारा सहायता समिति" की स्थापना की। संघ के कार्यवाह के नाते काम करते समय विवेकानंद शताब्दी महोत्सव का अवसर आया। केरल मे प्रसिद्ध समाज सेवी व नायर समुदाय के नेता श्री मन्नथ पदमनाभन के नेतृत्व मे कन्याकुमारी स्थित "विवेकानंद राक मैमोरियल समिति" की स्थापना की। परम पूजनीय श्री गुरु जी ने एक नाथ रानडे को इस कार्य के लिए नियुक्त किया। इन्होने धनराशि एकत्र की औऱ स्वामी विवेकानंद राष्टीय स्मारक का स्वप्न साकार हुआ। 22 अगस्त 1982 को गणेश चतुर्थी के दिन इनका निधन हो गय...

Diwali par Nibandh - Deepawali ka Mahatva - दीपावली का निबंध (महत्व)

Read about some line on Diwali Essay in Hindi. Dipawali par Nibandh. Here given some knowledge on importance of Deepawali for education. दीपावली पर निबंध, दीवाली पर निबंध, दीपावली का महत्व हिंदी मे दिया जा रहा हैं। दीपावली हिंदुओं का प्रमुख त्योहार हैं। 'दीपावली' का अर्थ हैं - दीपों की माला । यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता हैं। दीपावली को मनाने के कई कारण हैं । इस त्योहार को मनाने का वैज्ञानिक कारण भी हैं । यह त्योहार वर्षा ऋतु के आता है, जिसके कारण गंदगी औऱ मच्छर फैल जाते हैं ,इसलिए लोग अपने घरों की सफाई व लिपाई -पुताई करवाते हैं। दीपावली एक त्योहार नहीं वरन् त्योहारों की श्रंखला हैं। यह त्योहार पाँच दिन मनाया जाता हैं। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाते हैं।एसी मान्यता है कि इस दिन एक महान चिकित्सक भगवान धन्वंतरी की उत्पत्ति समुद्र मंथन के प्रादुर्भाव से हुआ था।इस दिन भगवान धन्वंतरी का जन्मदिन मनाया जाता हैं। इस दिन लोग पीतल के बरतन खरीदे जाते हैं।धन्वंतरि को आयुर्वेद की चिकित्सा करने वाले आरोग्य का देवता माना जाता...

Biography of Baba Sahab Amte in Hindi - बाबा साहब आमटे पर निबंध

Read about biography of Baba Sahab Amte for educational. Here given some lines about Baba Sahab Mate life history. बाबा साहब आमटे का जीवन परिचय हिंदी मे दिया जा रहा हैं। बाबा साहब आमटे पर निबंध बाबा साहब आमटे का पूरा नाम डा.मुरलीधर देवी आमटे था।इनका जन्म 26 दिसंबर 1914 को महाराष्ट्र मे स्थित वर्धा जिले मे स्थित हिंगणघाट गाँव मे हुआ था। इनके पिता देवीदास हरबाजी आमटे शासकीय सेवा मे लेखपाल थे। बाबा आमटे का बचपन बहुत ठाठ-बाठ मे बीता। इन्होंने एम. ए. ,एल. एल. बी. तक की पढाई की ।इनकी पढाई क्रिसिचयन मिशन स्कूल नागपुर विश्वविद्यालय मे कानून की पढाई की। इन्होने अपने वकालत के अनुभव से कानूनात्मक दृष्टि से दलितों ,शोषितों के हित मे बदलाव लाने के लिए अथक परिश्रम किया। इन्होंने कोलकाता मे वकालत औऱ कुष्ठ रोगियों की सेवा करने का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर आनंदवन आश्रम की स्थापना की। महात्मा गाँधी औऱ विनोबा भावे से प्रभावित बाबा आमटे ने सारे भारत मे भ्रमण किया औऱ देश के गांवों मे अभावों मे जीने वाले लोगों की असली समस्याओं को समझने की कोशिश की। सन् 1985 मे बा...

Biography of Dr.Rajendra Prasad in Hindi - डा. राजेंद्र प्रसाद पर निबंध

Read about some line on Dr. Rajendra Prasad biography in hindi for educational purpose. Given here a short note about Rajendra Prasad par nibandh in hindi. डा. राजेंद्र प्रसाद की जीवन परिचय व निबंध हिंदी मे दिया गया हैं। Biography of Dr. Rajendra Prasad डा. राजेंद्र प्रसाद हमारे स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। इनका जन्म 3 दिसंबर 1884 ई. मे बिहार प्रान्त के छपरा जिले मे जीरादेई नामक गाँव मे हुआ था। इनकी माता का नाम कमलेश्वरी देवी औऱ इनके पिता का नाम महादेव सहाय था। बारह वर्ष की आयु मे राजवंशी देवी के साथ इनका विवाह हुआ। ये सभी भाई -बहनों मे सबसे छोटे थे। पाँच वर्ष की आयु मे राजेन्द्र प्रसाद को उनके समुदाय की परम्परा के अनुसार एक मौलवी के सुपुर्द कर दिया गया।जिसने उन्हें फारसी सिखाई।वे विद्यार्थी काल मे सदैव प्रथम आते थे। ये गाँधी जी से बहुत प्रभावित थे। गाँधी जी के सम्पर्क मे आने के बाद ये स्वतंत्रता सग्रांम मे कूद पडे।इन्होने असहयोग आन्दोलन मे भाग लिया।इन्हे भारतीय राष्ट्रीय काग्रेस के बम्बई अधिवेशन का अध्यक्ष चुना गया। ब्रिटिश शासन मे उन्हें कई बार जेल जाना पड...

JAGDISH CHANDRA BASU par Eassy in Hindi - जगदीश चन्द्र बसु का जीवन परिचय | निबंध

Read about an essay on The great scientists SIR JAGDISH CHANDRA BASU. Here given some knowledge about Sir Jagdish Chandra Basu's life for educational purpose. Sir Jagdish Chandra Basu ki jivani par short note in hindi. सर जगदीश चन्द्र बसु का निबंध व उनका जीवन परिचय नीचे हिंदी मे दिया जा रहा हैं। Biography of Jagdish Chandra Basu. सर जगदीश चन्द्र बसु का जन्म बंगाल के ढाका जिले के विक्रमपुर कस्बे के निकट राढीखाल नामक गाँव मे 30 नवंबर 1858 ई. को हुआ था। ये प्रथम वैज्ञानिक थे जिन्होंने सर्वप्रथम बेतार के तार का अविष्कार किया, परन्तु एक गुलाम देश का नागरिक होने के कारण उस समय इन्हें यह श्रेय नहीं दिया गया। इन्होंने पहली बार यह सिद्ध कर दिया कि संसार के सभी पदार्थों मे जीवन हैं औऱ संसार के सभी पदार्थ सचेतन हैं। इन्होंने प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध कर कि मनुष्यों की तरह पेड़-पौधों मे भी जीवन होता हैं। इन्होंने एक ऐसा यन्त्र तैयार किया जिससे पौधों के ह्रदय की धड़कन, तथा दुख एवं कष्ट होने पर उनका रोना सुना जा सकना सम्भव हो गया। इस अविष्कार पर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ' ...

Veer Balak Hakikat Ray ka Balidan in Hindi Eassy - वीर बालक हकीकत राय का बलिदान पर निबंध

Read about essay of Veer Balak Hakikat Ray in Hindi. Vir Balak Hakikat Ray ka Balidan nibandh ki jankari. Short note on Vir Balak Hakikat Ray in hindi. वीर बालक हकीकत राय का निबंध व उसके बलिदान की जानकारी नीचे हिंदी में दिया जा रहा हैं। इस भारत भूमि पर ऐसे वीर बालक भी हुए जिन्होंने अपने बलिदान से समस्त विश्व को चकित कर दिया।ऐसा ही एक वीर बालक था हकीकत राय । इस बाल बलिदानी का जन्म पंजाब प्रांत के स्यालकोट नामक स्थान पर हुआ था।इसके पिता जी का नाम भागमल था औऱ इसकी माता का नाम कौरा देवी था। इनकी शिक्षा मदरसे मे हुई थी। एक दिन हकीकत ने अपनी पाटी पर दुर्गा माँ का चित्र बनाया। मौली को यह बात अच्छी नहीं लगी।उन्होंने देवी माता को बहुत बुरा भला बुरा कहा।यह बात बालक हकीकत को अच्छी नहीं लगी। उसने क्रोधित होकर कठोर शब्दों मे उत्तर दिया।फिर क्या था ?उस बालक पर अत्याचार का पहाड़ टूट पडा ।उसे मौत की सजा सुना दी गई। बसन्त पंचमी के दिन उस बालक का सिर काट लिया गया। मृत्यू-दण्ड से बचने के लिए उसे एक ही प्रलोभन दिया गया, कि वह अपना धर्म छोड़ दे। उस बालक ने मृत्यु को स्वीकार किया...

Eassy on Dussehra or Vijayadasmi in Hindi - विजयदशमी, दशहरा पर निबंध

Read about some line on Dussehra festival essay in Hindi. Vijaya dashmi par nibandh for education purpose. Here given some knowledge about Dussehra or Vijayadasmi Festival in hindi. दशहरा पर निबंध या विजय दशमी पर निबंध की जानकारी नीचे हिंदी में हैं। विजय दशमी का अर्थ :- विजय के उपलक्ष्य में मनाये जाने वाला उत्सव। यह विजय की घटना आज से हजारों साल पहले त्रेता युग की हैं। आपने राम औऱ रावण के युद्ध की कहानी तो सुनी ही हैं। रामलीला भी देखी होगी। अश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन ही, मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम ने रावण का वध करके विजय प्राप्त की थी। बस तभी से इस दिन को विजयोत्सव के रूप में मनाते हैं। इसी उत्सव को'दशहरा' भी कहते हैं,क्योंकि इसी दिन दस मुख वाला राक्षस मारा गया था। यह दिवस 'शस्त्र पूजन उत्सव' के रूप में भी मनाया जाता हैं। इस दिन क्षत्रिय औऱ वीर लोग अपने अस्त्र-शस्त्र की सफाई करके ,वीरता की देवी भगवती की उपासना की जाती हैं। प्राचीन काल में महिषासुर नामक एक राक्षस के अत्याचारों से तीनों लोकों के प्राणी अत्यंत दुखी हो गए औऱ' त्राहिमाम् त्रा...

Lal Bahadur Sastri Hindi Essay and Jivan Parichay - लाल बहादुर शास्त्री पर निबंध

Read about some line on Lal Bahadur Sastri Essay in hindi. Lal Bahadur Sastri ka jivan parichay or nibandh for education. Here given some knowledge about Lal Bahadur Sastri in Hindi. लाल बहादुर शास्त्री पर निबंध व जीवन परिचय नीचे हिंदी मे दिया गया है। श्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर1904 को वाराणसी के पास मुगलसराय में हुआ था।उनकी बाल्य अवस्था घोर निर्धनता औऱ कष्टों मे बीता।जब वह डेढ़ साल के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। सोलह वर्ष की अवस्था में वे गाँधी जी के आह्रान पर स्कूल की पढाई छोड़ कर असहोग आन्दोलन में कूद पडे औऱ उन्हे गिरफ्तार कर लिया गया। तब से वे निरन्तर देश की आजादी के लिए अंग्रेज सरकार से लड़ते रहे। वे बड़े विनम्र ,सत्यवादी ,ईमानदारी औऱ कर्मठ समाज सेवक थे।अतः स्वतंत्रता प्राप्ती के उपरांत केन्द्रीय मंत्री -मंडल में उन्हें रेल मंत्री का कार्यभार सौंपा गया।सन् 1957 में उन्हें गृहमंत्रालय सौंपा गया औऱ सन् 1964 में नेहरु जी के देहांत के बाद वे प्रधानमंत्री बने। 1965 में जब पाकिस्तान ने हमारे देश पर आक्रमण किया तब शास्त्री जी ने दृढता से उसका मुकाबला क...

Pt.Dindayal Upadhyay ka Jivan Parichay in Hindi - पं दीनदयाल पर निबंध

Read about some line on Pt. Dindayal Upadhyay Eassy in hindi for education. Given here a short notes about Pt.Dindayal upadhyay par Nibandh / Jivan Parichay in Hindi. पं.दीनदयाल उपाध्याय का जीवन परिचय हिंदी भाषा में दिया गया हैं। पं.दीनदयाल उपाध्याय का जन्म अश्विन कृष्ण 13संवत् 1973 अर्थात 25 सितम्बर सन् 1916 को मथुरा जिले के चन्द्र भान नगला गांव मे हुआ था। बचपन में ही माँ-बाप का साया उनके सिर पर से उठ गया था परन्तु वे बड़े परिश्रमी औऱ मेधावी थे।उन्होंने बोर्ड औऱ विश्वविद्यालय की परिक्षाओं में सवोत्तम अंक प्राप्त किये औऱ पढने-लिखने के बाद नौकरी न करके अपने को राष्ट्र सेवा में लगा दिया।उन्होंने विवाह भी नहीं किया।वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक हो गये औऱ बाद में वे जनसंघ के मंत्री औऱ फिर अध्यक्ष भी बने। वे अत्यंत विनयशील औऱ राष्ट्र को समर्पित व्यक्ति थे। उनके प्रभाव से भयभीत होकर राष्ट्र द्रोहियों ने उनकी हत्या कर दी। पं.दीनदयाल उपाध्याय आधुनिक युग के एक कर्मयोगी थे।वे प्रति क्षण अपने राष्ट्र के लिए कार्य करते थे।वे इतनी सादगी से रहते थे कि उनके बडे होने का अनुमान भी नहीं लग...